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'मनुष्य उस अप्रतिम सौन्दर्य की महक का दर्पण है और सत्य के रूप में ईश्वरीय शक्ति को इसमें प्रतिबिंबित करता है।''

द्वारा हज़रत मीर घोतेबोद्‌दीन मोहम्मद अंघा
पठन
सूफीवाद व ज्ञान
"जब हम इस संसार को देखते हैं, हम पाते हैं कि यह कितनी शांत और सौम्य है। इसका कारण है ज्ञान और स्थिरता। संसार महज ज्ञान ही है। अगर यहाँ से वहाँ तक फैले इस विशाल संसार में स्थिरता एवं शांति कायम करना संभव है, तो हमें यह स्थिरता एवं शांति लघुतर इकाईयों –अणु से लेकर इंसानी समाज तक, क्योंकि ये सृष्टि का ही अंग हैं - में भी देखना चाहिए।
सूफीवाद के अध्यापन में, इंसान को सृष्टि की सर्वोत्तम छवि माना गया है, जो सूक्ष्म ब्रह्माण्ड और लघु ब्रह्माण्ड–शारीरिक, चुंबकीय, और आध्यात्मिक से लेकर पाताल की गहराई तक है, यदि हम आस्तित्व के इस छवि का प्रयोग करें।
इस ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी है, वह सब इंसान में मौजूद है। अमीर अल-मो’मेनिन अली (शांति दूत) ने 1400 वर्ष पहले कहा था:

क्या आप ये सोचते हैं कि आप सूक्ष्मजीवी हैं?
आपके अंतस में एक विशाल संभावना है,
और आप एक पारदर्शी पुस्तक के समान है जिसके पृष्ठ आत्मतत्व की विवेचना करते हैं।
सूफीवाद एक महक है, एक तरीका है, एक ऐसा अनुशासन है जो प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रतिभा और अदृश्य क्षमताओं का परिचय करवाता है साथ ही अस्तित्व के महान बोध का परिचय भी इसी से होता है। "

द्वारा - मौलाना सलाहेद्दीन अली नादेर शाह अंघा, “पीर ओवैसी”
प्रकाशक: एम.टी.ओ. प्रकाशन