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'प्रेम की मधुर सुगंध, स्वर्ग की ताज़गी और टिमटिमाते तारों की चमक, ये सब वहां पर है जहां पर विनम्र आत्माएं विचरण करती हैं। अविश्वास से वास्तविक घटनाक्रम दृष्टिओझल हो जाता है। और आपकी आत्मिक मृदुता अपकी आत्मा के पुनर्जागरण हेतु प्रतिबद्घ होती है।''

आत्मिक संदेश
हज़रत सलाहेद्‌दीन अली नादर अंघा द्वारा
मोवाजेने®
जब हम मोवाजेने के अर्थ को जानने का प्रयास करते हैं, तब हमें इस शब्द के इतिहास की ओर जाना होगा। मोवाजेने का वास्तविक अर्थ है संतुलन।यही कारण है कि इसे शरीर के संतुलन व सामंजस्य की सूफी कला कहा जाता है। एमटीओ शाहमकसुदी, इस्लामी सूफीबाद की पाठशाला का ये नवीन शिक्षण कार्यक्रम है जिसे वर्तमान सूफी गुरू प्रोफेसर नादर अंघा द्वारा विकसित किया गया है।

मोवाजेने के अभ्यास में साधक को किसी भी एक ही बिन्दु पर लक्ष्य केन्द्रित करना आवश्यक होता है। एकाग्रता के ज़रिये ये जागरण पूरे शरीर में फैलाया जाता है जिससे साधक को वर्तमान क्षण का भान हो सके। मोवाजेने की मुद्राओं से आपके शरीर व मन के विचारों का एकीकरण होता है।

विशिष्ट मोवाजेने अभ्यास से शारीरिक, मानसिक व विद्युतचुंबकीय गतिविधियों का विकास होता है और जागरूकता का स्तर बढ़ता है।

मोवाजेने® के लाभ®

दैनिक थकान समाप्त होती है।
  • दैनिक अभ्यास से लाभ होता है
  • सामान्य दर्द समाप्त हो जाता है जो पेशीय संकुचन के कारण होता है।
  • रक्त संचरण में मदद मिलती है।
  • प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
  • शरीर का लचीलापन बना रहता है।
  • शरीर व मस्तिष्क के भिन्न क्षेत्रों का संतुलन बना रहता है।